कोरबा : लखाली गाँव म सैकड़ो बछर ले सरलग चलत हे बिहनिया बेरा के राम-राम।
Vivek Sahu
Fri, Jul 17, 2026

लखाली गाँव म सैकड़ो बछर ले सरलग चलत हे बिहनिया बेरा के राम-राम।
बड़े बिहनिये गाँव भर म, कीर्तन भजन कींदरथे।
तेकर पाछु बिहान पहात, सूरूज नरायण निकलथे।।
संगवारी हो हमर जिनगी म नानपन के दिन म जउन हमन के संग गुजरे रथे तेन हर हमर मन के सुरता बन के हमन के हिरदय म कहूं न कहूं मेर ठीहा बना के रहे रथे । ये सुरता हर हमन ल ओ पुरखा ल भुलान नइ देवय जेमन अपन जिनगी म उही फर्रा के मुताबिक गुजर बसर करत रहिन जे हर हमन के मन म छाप छोड़ देथे।
फेर जीवन जीए के ओही तरीका हर सबो दिन ले एके बरोबर नई चलत रहय । बेरा बखत हर जइसन-जइसन बुलकत जाथे तइसन-तइसन जिनगी के रहन बसन म घलो बदलाव आत जाथे।
फेर कई ठन अइसे रीती रिवाज अउ परंपरा ल सियान मन गढ़ के जाय रथे ,जेला हमन भुला नई सकन अउ हरदम निभात रथन।
एसने हमर पुरखा मन के देन एक ठन परंपरा के बारे म अपन अनुभव आप मन ल बतात हव, ए गोठ हर हमर पैतृक गाँव लखाली के आय ।
गाँव लखाली हर छत्तीसगढ़ राज्य म जांजगीर-चांपा जिला के अंतर्गत बम्हनीडीह के तीर म बसे हे ,जेकर उत्ती म सोन नदी अउ बूड़ती म जमड़ी नाला आशिष देत बोहत हे।
भगवान श्री राम के भक्ति म डूबे गाँव लखाली के वईसे तो कई ठन खुबी हे जेमा एक ठन हावय हरि कीर्तन करत बिहान बेरा के प्रभातफेरी ।
ए परंपरा हर कब ले चलत हे तेकर ठीक ठीक बखान करना मोर बस के बात नोहे, काबर कि गाँव के बड़े बुजुर्ग मन भी एकर शुरूवात केे खचित आरो नई दे पात हे ।
ए परंपरा हर चलत सौ बछर ले जादा हो गय हे, सियान मन के मुताबिक पहिली झुलझुलहे बेरा म उठ के एक दुसर ल राम-राम कहत जोहार पलगी संग अपन दिनचर्या के शुरूआत करंय ,अउ राम नाम लेत लेत भजन कीर्तन करत रहय ।
उही बखत ओमन के मन म एक ठन उदिम समाईस के जेन हर बिहान के बेरा आगू उठिहा तेन हर भजन करत आगू बढ़त जाही अउ ओकर अवाज ल सुनके जेन उठत जाही तेन हर उखर संग म जुड़त जाही ।
एसने करत कोरी डेड़ कोरी झन के जुड़ाव होके टोली बन जाय तहले ओमन गांव के जन्मों गली मुहल्ला म भजन कीर्तन करत कींदरय एसने कतत करत दिन बीतत गिस।
थोरकिन दिन बाद ओमन झांझ, मंजीरा अउ मृदंग के उपयोग करे लगिन। लेकिन झक्कर झंझियार के कभू कभू नागा घलो पर जाय।
एक दिन गांव के सियान मन सलाह होके सबो ग्रामवासी मन ल गुड़ी के बैठका म जुरियाय बर आरो करिन, जब गांव के सबो लईका जवान सियान मन जुरिया गिन त बड़े गुरूजी हर अपन गोठ ल आगू बढ़ात कहिन कि हमर गांव के पुरखा मन कतका सुग्घर अड़बड़ दिन ले बिहनिया के बेर कीर्तन भजन करत गाँव के जम्मो गलि मुहल्ला म अलख जगात कींदरथें उखर आवाज ल सुन के हमू मन जल्दी उठ के अपन अपन दिनचर्या म लग जाथन ।
फेर कभू कभू सियान समरथ मन झक्कर झंझियार के नई निकल पाय तेकर सेति नागा हो जाथे । त मोर एक ठन विचार रहिस कि गाँव के सबो संगी मन के सलाह माढ़ जातिस त गांव भर ल ग्यारह पाली म बांट देतेन अउ हर पाली ह एक-एक महिना कीर्तन भजन करत गांव के जन्मों गली मुहल्ला म अलख जगाहीं अउ उखर मन के संग म जेन मन सम्मिलित होना चाही ओमन हो सकथे।
एतका गोठ ल सुन के गांव के सबो लईका जवान सियान मन गुरूजी हर बने गोठ ल कहत हे करके अपन अपन रजामंदी देवत गिन।
जब सब के सलाह माढ़ गे तब पूरा गाँव ल ग्यारह पाली म बांट दिए गिस ताकि सब के पाली म सब मौसम हर परय।
तब ले भगवान महावीर बजरंगबली के ध्वजा हर जेकर पाली रथे तेकर मुहल्ला म विराजमान रथे, अउ ओ पाली वाला मन पूरा महिना भर गाजा बाजा के साथ कीर्तन भजन करत गाँव भर म फेरी लगात जम्मो देवता धामी मन के ठउर मंदिर तक पहुचथें अउ जयकारा लगा के सबो झन के मंगलकामना करत गोहार लगाथें।
ओसने करत करत आगू बढ़त फेर उही जगह जहां मेर बजरंगबली के ध्वजा बिराजमान रथे तिहा लहुट आथें अउ फेरी के समापन करत जयनाद करथें।
एसने पूरा एक महिना भर ले जेकर पाली रथे ओ पाली वाला मन महिना के परिवा ले शुरू कर के पून्नी के दिन तक भगवान के जस ल गाथें ,अउ जब पून्नी के दिन होथे तौन दिन संझा के बेरा महावीर बजरंगबली के ध्वजा के पूजा आरती करके हरि कीर्तन करत गांव भर म घुमा के आगु पाली वाला मुहल्ला म विराजमान करथें ।
जेन पाली के महिना पुर जाथे तेन पाली वाला मन पुन्नी के रात म रमायन के आयोजन करथे जेमा गाँव भर के जम्मो रमयनहा पाली मन ओसरी पारी रात भर भगवान श्री राम चन्द्र जी के महिमा ल गायन प्रवचन करथें अउ श्रोता मन ल कृतार्थ करथें ।
गाँव के पुरखा मन के शुरुआत करे ए परंपरा हर गाँव लखाली म आज ले बारो महिना बिना नागा करे ओसरी पारी चलत आत हे।
चाहे बरसात रहय, जड़कल्ला रहय या गर्मी के मौसम रहय।बरसात के मौसम म बाजा- रूंजी ले जात नई बनय त बिना बाजा के भजन कीर्तन गात फेरी लगाय जाथे, फेर ए परंपरा हर सरलग चलत आत हे।
लखाली गाँव के प्रभात फेरी कीर्तन के दूर दूर तक सोर बगरे हे गाँव वाले मन एकर रोचकता बनाय रखे खातिर बीच बीच म अखण्ड राम नाम सप्ताह के आयोजन घलो करथें जेमा सम्मिलित होय खातिर दूर दूर से कीर्तन मंडली मन झांकी सहित पहुँच के अपन कला के प्रदर्शन कर दर्शक मन के मन ल मोह लेथें।
रिपोर्ट.....प्रहलाद चन्द्र "लखलिया"
जैजैपुर, छत्तीसगढ़
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन