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: राजौरी दिवस के उपलक्ष्य पर सेना द्वारा आयोजित मेले में दिखा उत्साह , जवानों व वीर नारियों को भी किया पुरस्कृत

Vivek Sahu

Wed, Jun 12, 2024
जम्मू/राजौरी_(न्यूज उड़ान ) राजौरी दिवस के उपलक्ष्य पर 25 इन्फेंट्री डिविजन मुख्यालय के तत्वाधान एस आफ स्पेड्स डिविजन द्वारा जम्मू संभाग के राजौरी जिले के एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) राजौरी में मेले का आयोजन कर शहीदों को याद किया गया।   मेले का शुभारंभ गौरव ऋषि जनरल आफिसर कमांडिग 25 इन्फेंट्री डिविजन ने तीन रंगे गुबारे उठाकर किया। मेले में एनसीसी, आर्मी स्कूल के बच्चों द्वारा रंगा रंग ब संस्कृति कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। सेना की गोरखा टुकड़ी द्वारा हथियार प्रदर्शनी, डाग शौ, गुड सवार , गोला बारूद प्रदर्शनी के साथ मेडिकल शिविर का आयोजन किया गया।   जवानों व वीर नारियों व भाग लेने बालों भी किया पुरस्कृत किया गया। सेना ने जीएमसी अस्पताल को वील चेयर भी दी।   इस मौके पार डीसी राजौरी , पुलिस अधिकारी, जीएमसी प्रशासन के साथ साथ गणमान्य व आम लोग उपस्थित रहे।   बताते चलें कि 15 अगस्त 1947 को पूरे देश में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था।   जो हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान को रास नहीं आया। उसने कबाइलियों को भेजकर राज्य पर कब्जा करने का असफल प्रयास किया।   सेना ने कबाइलियों को घाटी से खदेड़ा तो वे राजौरी में घुस आए और तीस हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया।   बड़ी संख्या में महिलाओं ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। कई महिलाओं ने अपनी बेटियों के साथ जहर खा लिया तो कुछ ने कुएं में छलांग लगा बलिदान दे दिया।   12 अप्रैल 1948 की आधी रात तक राजौरी पर कहर टूटता रहा। लेकिन 13 अप्रैल 1948 का सूरज खुशियां लेकर आया।   इस दिन भारतीय सेना ने राजौरी को कबाइलियों से मुक्त करा अपने कब्जे में ले लिया।   राजौरी सिटी के बीच तहसील कार्यालय के पास बलिदान भवन मौजूद है। जिसका निर्माण 1969 में करवाया गया और बलिदान भवन के साथ व तहसीलदार कार्यालय के पास शहीदों की याद में बीते वर्ष बलिदान स्तंभ बनाया गया। और मालमंडी ( गुज्जर मंडी) चौक में शहीदी स्मारक है।   जहां हर वर्ष 13 अप्रैल को शहीदों को सेना, पुलिस प्रशासन व लोगों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। और राणे हवाई पट्टी ( सैन्य मैदान) राजौरी में सेना द्वारा मेले का आयोजन भी किया जाता है।   लेकिन इस बार राजौरी दिवस के उपलक्ष्य में 11 जून मंगलवार को मेले का आयोजन कर इतिहास के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। .... अनिल भारद्वाज

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