: राष्ट्र धर्म की पाठ सिखाने ,फिर आना श्री राम प्रभु।
Vivek Sahu
Sun, Apr 6, 2025
नयन निहारे, दुलार लुटाने ,
है तैयार ननिहालप्रभु।
ठुमक ठुमक पैजनीया छनकाते ,
मोहनी सूरत को दिखलाने।
मातृभूमि की महिमा बतलाने,
फिर आना एक बार प्रभु।
राष्ट्र धर्म की पाठ सिखाने ,
फिर आना श्री राम प्रभु।
इर्षा , घृणा ,और नशा मे ,
डूब रहा ये संसार प्रभु।
हिंसा , शोषण ,लूट तंत्र से ,
द्रवित हो रही ये धरा प्रभु ।
पावन करने भारत भूमी को ,
मर्यादा पुरुषोत्तम , श्री राम प्रभु।
राष्ट्र धर्म की पाठ सिखाने ,
फिर आना एक बार प्रभु।
दूषित हो चुकी भोजन शैली,
कराहता जीवन बीमार प्रभु।
शबरी मां की बेर चखाने,
सिखलाने शाकाहार प्रभु।
डगमग डोले जीवन नैया,
संबल देना केवट को,थाम लेना पतवार प्रभु।
राष्ट्र धर्म की पाठ सिखाने ,
फिर आना श्री राम प्रभु।
अश्लीलता सुर्पनखा की ,
बढ़ चुकी अभिमान प्रभु ।
कलंकित हो रही मानव चरित्र ,
मर्यादा तार तार प्रभु।
जीवन आदर्श की मान बचाने ,
फिर आना एक बार प्रभु ।
राष्ट्र धर्म की पाठ सिखाने,
फिर आना श्री राम प्रभु ।
हरण हो चुकी मां सीता का ,
कटा जटायु का पंख प्रभु।
कर रहा है रावण तांडव ,
भीषण हाहाकार प्रभु।
घिरा राष्ट्र विधर्मियो से ,
करने को उत्थान प्रभु ।
राष्ट्र धर्म की पाठ सिखाने ,
फिर आना श्री राम प्रभु।
झूठ कपट का चलन बढ़ गया ,
दिखता सत्य लाचार प्रभु ।
पतित हो रही सनातन संस्कृति की,
रक्षक बन श्री राम प्रभु।
मातु पिता की वचन निभाने ,
फिर आना श्रीराम प्रभु ।
राष्ट्र धर्म की पाठ सिखाने ,
फिर आना एक बार प्रभु ।
बहे जा रहें हैं भवसागर में,
नहीं किसी की आस प्रभु।
विनय हमारी स्वीकार कर,
करें हमारी उद्धार प्रभु।
नयन निहारे दुलार लुटाने,
है तैयार ननिहाल प्रभु।
राष्ट्र धर्म की पाठ सिखाने ,
फिर आना श्री राम प्रभु।
रचनाकार - प्रहलाद चन्द्र लखलिया जैजैपुर, छत्तीसगढ़Tags :
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