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: एस.ई.सी.एल. की सी.एस.आर. राशि से कोरबा में सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल की स्थापना तथा मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कालेज की स्थापना हेतु नेता प्रतिपक्ष हितानंद ने मुख्यमंत्री साय को लिखा पत्र।

Vivek Sahu

Sat, Feb 3, 2024
कोरबा (न्यूज उड़ान )नेता प्रतिपक्ष हितानंद अग्रवाल ने सूबे के मुखिया विष्णुदेव साय को जिलाधीश कोरबा के माध्यम से पत्र लिखकर एस.ई.सी.एल. की सी.एस.आर. राशि से कोरबा में सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल की स्थापना तथा मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कालेज की स्थापना की मांग की है। इसकी प्रतिलिपि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा जी, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रहलाद जोशी, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंहदेव जी को भी भेजी गई है | नेता प्रतिपक्ष हितानंद अग्रवाल ने कहा कि एस.ई.सी.एल. प्रबंधन द्वारा गेवरा प्रोजेक्ट, कुसमुण्डा प्रोजेक्ट, दीपका प्रोजेक्ट, मानिकपुर प्रोजेक्ट, बुड़बुडा प्रोजेक्ट से कोयले की बहुत बड़े स्तर में खनन की जाती है, जिससे कोरबा तथा आसपास के क्षेत्र प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित होते है।   एस.ई.सी.एल. का मुख्यालय बिलासपुर में स्थित है तथा बिलासपुर में बड़े अधिकारी कार्यरत है। एस.ई.सी.एल. प्रबंधन के सी.एस.आर. मद से बिलासपुर में अपोलो हास्पिटल की स्थापना की गई है, जिससे बिलासपुर में कार्यरत अधिकारियो व कर्मचारियों को ही उक्त अपोलो हास्पिटल का लाभ प्राप्त होता है। जबकि खनन का कार्य कोरबा, चिरमिरी व आसपास के क्षेत्रों में किया जाता है। कोरबा तथा आसपास के गांव प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित होते है। कोरबा व आसपास के ग्रामों की भूमि अधिग्रहण कर कोल माइनिंग की जाती रही है। कोल माइनिंग से कोरबा व आसपास के गांव में रहने वालें व्यक्ति प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित होते है, परन्तु उनके ईलाज के लिये अपोलो जैसा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल कोरबा में स्थापित नही किया गया है। बड़े अधिकारियों के ईलाज हेतु एस.ई.सी.एल. द्वारा अपने सी.एस.आर. मद से मुख्यालय बिलासपुर में अपोलो हॉस्पिटल की स्थापना करवायी गयी है, जबकि उक्त अपोलो हॉस्पिटल सर्वप्रथम कोरबा में स्थापित किया जाना चाहिये था। बिलासपुर में अपोलो हॉस्पिटल के साथ-साथ एस.ई.सी.एल. प्रबंधन को कोरबा में भी अपोलो जैसी सुविधा के अस्पताल की स्थापना की जानी चाहिये थी, क्योंकि कोरबा व आसपास के क्षेत्र में माइनिंग में ज्यादातर मजदूर श्रेणी के कर्मचारी कार्यरत है, जिस स्थान से कोयले की माइनिंग की जा रही है, उस स्थान के लोगो को अपोलो जैसे हॉस्पिटल की सुविधायें मिलने का हक सर्वप्रथम है। श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 06 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ इन्टीग्रेटेड डेव्हलपमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर कमेटी का गठन किया गया था, उक्त कमेटी के द्वारा पूरे प्रदेश के अधोसंरचना के विकास हेतु ब्लू प्रिंट तैयार किया गया था, उक्त कमेटी द्वारा भी अनुशंसा की गई थी कि प्रोफेशनल हॉस्पिटल्स जैसे कि अपोलो, फार्टिस इत्यादि स्तर के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कोरबा में स्थापित किया जाना चाहिये। कम्पनी एक्ट के अनुसार 2 प्रतिशत राशि सी.एस.आर. मद में खर्च किये जाने का प्रावधान है। एस.ई.सी.एल. प्रबंधन के पास पर्याप्त सी.एस.आर. फण्ड हमेशा उपलब्ध रहती है, यदि एस.ई.सी.एल. प्रबंधन अपने सी.एस.आर. फण्ड से अपोलो अथवा फोर्टिस स्तर के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्थापना कोरबा मे कर सकती है।   कोरबा व आसपास के गांव जिनकी भूमियां अधिग्रहित की गई है, वे लोग कोल माइनिंग से प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हो रहे है। हमारी भाजपा सरकार का लक्ष्य रहा है कि समाज के अन्तिम व्यक्ति तक लाभ व सुविधायें पहुंचायी जा सके, हमेशा से नीचे तबके के लोगों को उठाने हेतु हमारी भाजपा सरकार करती रही, उसी को आगे बढ़ाते हुये माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी से अनुरोध है कि कोरबा में अपोलो अथवा फोर्टिस स्तर के सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल की स्थापना हेतु एस.ई.सी.एल. को निर्देश जारी करने की कृपा करेंगे तथा साथ ही साथ चूंकि मनेन्द्रगढ़ भी कोल माइनिंग से प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित क्षेत्र है, अतः मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज की स्थापना किये जाने का भी निर्देश जारी करने की कृपा करेंगे। पूर्व में एस.ई.सी.एल. प्रबंधन द्वारा सन् 2010 में इन्टीग्रेटेड कमेटी को प्रस्ताव दिया गया था कि मनेन्द्रगढ़ में यदि राज्य सरकार भूमि उपलब्ध करावेगी तो एस.ई.सी.एल. प्रबंधन मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कालेज की स्थापना करने हेतु तैयार है।

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