Tuesday 21st of April 2026

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कोरबा रिपेयर के लिए दिया ट्रेक्टर बेच दिया, महामाया ट्रेक्टर के संचाल : दस्तावेजों में कूटरचना कर अमानत में खयानत का गंभीर आरोप। पुलिस एक महीने से जांच में उलझी,पीड़ित को त्वरित कार्रवाई की द

कोरबा( न्यूज उड़ान) निजी स्वामित्व के टैक्टर को कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अन्य को नये वाहन के रूप में बिक्री करने और अमानत में खयानत करने की शिकायत पर पुलिस जांच कर रही है।

पीड़ित को इस मामले में त्वरित एफआईआर की कानूनी राहत नहीं मिल पाने से उसे सांठगांठ का पूर्ण अंदेशा है।

इस मामले के पीड़ित राजा गुप्ता, निवासी कोरबा ने जिला पुलिस अधीक्षक से की गई शिकायत में बताया कि- मेरे द्वारा पूर्व में दिनांक 18.03.2026 को चौकी- सीएसईबी, कोरबा को शिकायत की गई थी ,जिस पर आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं किया गया है।

मैं टैक्टर के माध्यम से बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई का काम करता हूं कि वर्ष 2022 में महामाया ट्रेक्टर सक्ती की उपशाखा कोरबा जो कि ट्रांसपोर्ट नगर में स्थित है।

जिसका प्रोपराईटर सुमित अग्रवाल पिता- प्रेमचंद अग्रवाल है से एक टैक्टर जॉन डियर कंपनी का जिसका इंजन नंबर- PY3029D660561 एवं चेचिस न.-1VY5105DJMA033369 है को एल.एन.टी. कंपनी से फायनेंस कराकर क्रय किया।

वाहन की किश्तें नियमित रूप से कंपनी को अदायगी कर रहा था परंतु सुमित अग्रवाल पिता प्रेमचंद अग्रवाल जिससे अनेकों टैक्टर क्रय करने के कारण पूर्व से परिचित था, से मांगे जाने पर भी सुमित अग्रवाल के द्वारा टैक्टर वाहन पंजीयन पुस्तिका एवं बीमा के दस्तावेज नहीं दिये गये।

परंतु LNT फायनेंस कंपनी के फायनेंस के दस्तावेज में इंजन और चेचिस नंबर के जिक्र के साथ फायनेंस राशि का जिक्र है।

02 वर्ष तक मेरे द्वारा उक्त ट्रेक्टर जिसका इंजन नंबर- PY3029D660561 एवं चेचिस न.-1VY5105DJMA033369 का संचालन किया गया।

तकनीकी खराबी आने के कारण सुधार हेतु सुमित अग्रवाल के यहां ट्रांसपोर्ट नगर में छोड़कर आया था।

जहां कुछ दिन बाद जाने पर सुमित अग्रवाल ने जानकारी दी कि उक्त टैक्टर को सक्ती स्थित वर्कशॉप में बनाने हेतु भेजा गया है और उसके बाद सुमित अग्रवाल 6 माह तक आज बन जायेगी, कल बन जायेगी कहकर घुमाता रहा।

दिनांक 14.02.2026 को सक्ती जाकर सुमित अग्रवाल से वाहन की मांग की तो उसने मुझसे कहा कि, मैने तुम्हारा टैक्टर बेच दिया जो उखाड़ना है उखाड़ लो, जिससे मैं हतप्रभ हो गया।

चूंकि सुमित अग्रवाल और उसका परिवार सम्पन्न एवं प्रभावशाली परिवार है।

मैं चुपचाप कोरबा आ गया और मैंने आर.टी.ओ. कार्यालय जांजगीर से जानकारी ली तो पता चला कि, उक्त इंजन नंबर- PY3029D660561 एवं चेचिस न.-1VY5105DJMA033369 में जॉन डियर कंपनी का ट्रेक्टर जिला परिवहन कार्यालय जांजगीर चांपा में दिनांक 18.11.2025 को मोरतध्वज पटेल पिता उद्धव प्रसाद पटेल के नाम पर वाहन क्र.- CG-11-BT-7951 पर नये वाहन के रूप में पंजीकृत की गई है।

इस तरह 2 वर्ष तक मेरे द्वारा उपभोग किये गये वाहन को दस्तावेजों के कूटरचना कर नये वाहन के रूप में सुमित अग्रवाल द्वारा अन्य सहयोगियों के साथ सांठ-गांठ कर अन्य को बेच दिया है।

इस प्रकार मेरा टैक्टर वाहन जिसे सुधार कार्य हेतु सुमित अग्रवाल के पास दिया था जो कि सुमित अग्रवाल के पास मेरी अमानत के रूप में नयस्त था जिसे सुमित अग्रवाल द्वारा मुझसे छल करते हुये अमानत में खयानत की गई है और उक्त कार्य के लिए शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना की है।

पीड़ित ने बताया कि उक्त वाहन का ई.एम.आई. 3,60,000/- (तीन लाख साठ हजार रूपये) देना शेष है।

उक्त टैक्टर वाहन से बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई का कार्य कर आय अर्जित कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था, को सुमित अग्रवाल के द्वारा अन्य व्यक्ति को नये वाहन के रूप में बेच दिये जाने से मुझे आर्थिक एवं मानसिक परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है।

अतः महोदय से निवेदन है कि, सुमित अग्रवाल के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर दण्डात्मक कार्यवाही किये जाने की कृपा करें।

अब तक जांच में ही उलझाया, कह रहे कोर्ट जाओ

राजा गुप्ता ने बताया कि उसने 18 मार्च 2026 को सीएसईबी पुलिस सहायता केंद्र में लिखित शिकायत किया था जिस पर कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने पर 30 मार्च को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत किया।

किंतु फिर भी कोई कार्रवाई न होने पर पुन: 6 अप्रैल को जिला एसपी कार्यालय में स्मरण कराया।

एसपी ऑफिस से पता करने पर मालूम हुआ कि मामला कार्रवाई हेतु सीएसईबी चौकी भेज दिया गया है।

जब पीड़ित ने सीएसईबी चौकी की जाकर पता किया तो वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें अभी जांच चल रही है और एफआईआर नहीं होगी, कोर्ट जाकर राहत ले सकते हो।

पीड़ित इस जवाब से हतप्रभ रह गया, उसने प्रभावशाली सुमित अग्रवाल से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा है कि गरीबों के लिए कोई न्याय नहीं है, पूरे प्रमाण देने के बाद भी एफआईआर न कर कोर्ट में ले जाकर पीड़ित को उलझाने और आरोपी को राहत देने की दिशा में काम किया जा रहा है।

राजा गुप्ता ने बताया कि सुमित अग्रवाल को कुछ कंपनी ने इस तरह की गतिविधियों कारण ब्लैक लिस्ट कर रखा है।

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