Monday 27th of April 2026

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कोरबा : कोरबा में शुरू हुआ महिला स्व सहायता समूहों द्वारा रेडी टू ईट उत्पादन, फरवरी से 18 हजार हितग्राही होंगे लाभान्वित

कोरबा (न्यूज उड़ान) फरवरी माह से इस परियोजना से मोदी की गारंटी उतरेगी धरातल पर, जानें कितने आंगनबाड़ी केंद्रों के हितग्राही होंगे लाभान्वित।

सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 पूरक पोषण आहार व्यवस्था अंतर्गत रेडी टू ईट, फोर्टीफाइड आटा आपूर्ति कार्य के लिए कोरबा ग्रामीण परियोजना की समूह रेडी, मार्च से कोरबा शहरी, करतला, पाली, पोंडी भी आ जाएंगी उत्पादन में ।

कोरबा तमाम पेचिदगियों, शिकवा शिकायतों, कार्रवाई के बीच आखिरकार छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के सवा 2 साल बाद साय सरकार का महिला स्व सहायता समूहों से चुनाव पूर्व किया वादा, मोदी की गारंटी पर आकांक्षी जिला कोरबा में मोहर लगने जा रही है।

पॉयलट प्रोजेक्ट वाले जिलों में शामिल आकांक्षी जिला कोरबा के कोरबा ग्रामीण परियोजना का चयनित स्व सहायता समूह सफुरा माता स्व सहायता समूह सलिहाभांठा ने स्वचलित मशीन से रेडी टू ईट उत्पादन का कार्य शुरू कर दिया है ।

फरवरी माह से इस परियोजना के 12 सेक्टर के 348 आंगनबाड़ी केंद्रों के करीब 14 हजार हितग्राही (नौनिहाल, गर्भवती शिशुवती, किशोरी बालिका ) लाभान्वित होंगे।

मार्च माह से करतला, कोरबा शहरी, पाली, पोंडी उपरोड़ा की महिला स्व सहायता समूह भी उत्पादन वितरण की स्थिति में आ जाएंगी।

यहाँ बताना होगा कि महिला एवं बाल विकास विभाग 6 माह से 6 वर्ष के नोनिहालों ,किशोरियों,गर्भवती एवं शिशुवती माताओं के पोषण के लिए कार्य करती है।

1 फरवरी 2022 के पूर्व स्थानीय महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार कार्यक्रम अंतर्गत रेडी टू ईट कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा था।

गेहूं, सोया, चना, मूंगफली मिश्रित पौष्टिक पोषण आहार रेडी टू ईट 3 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं के लिए प्रत्येक मंगलवार को दिए जाने का प्रावधान है ताकि उन पर कुपोषण की काली छाया न पड़े, कुपोषित हितग्राही इसके दायरे से बाहर निकल सकें।

3 से 6 वर्ष के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन में फोर्टिफाइड आटा से निर्मित रोटी प्रदाय किया जाता है।

लेकिन 24 दिसंबर 2021 को छत्तीसगढ़ शासन ने द्वारा कैबिनेट में लिए गए निर्णय अनुसार 1 फरवरी 2022 फरवरी से राज्य बीज निगम की स्थापित इकाईयों के माध्यम से स्वचलित मशीनों के माध्यम से रेडी टू ईट का उत्पादन करने का निर्णय लिया था।

इसके पीछे शासन ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाईन का हवाला दिया था जिसमें मानव स्पर्श रहित गुणवत्ता युक्त आवश्यक पोषक तत्वों से भरे रेडी टू ईट बच्चों की सेहत के लिए उपयुक्त बताया था।

हालांकि सरकार के इस फैसले से करीब डेढ़ दशक से रेडी टू ईट का निर्माण कर रहीं स्व सहायता समूह के हाथों से रोजगार छीन गईं ।

पूरे प्रदेश में 20 हजार से अधिक महिलाएं सीधे तौर पर इससे प्रभावित हुईं ।

लाखों रुपए कर्ज लेकर विषम परिस्थितियों में भी स्व सहायता समूहों की महिलाओं ने योजना का सुचारू संचालन किया था ।

तमाम विरोध प्रदर्शन के बावजूद 24 मार्च 2022 से पूर्ण रूप से छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रायपुर की स्थापित यूनिट को कार्य सौंप दिया गया था।

सत्ता परिवर्तन के बाद विधानसभा चुनाव में भी रेडी टू ईट का दायित्व चरणबद्ध रूप से स्थानीय महिला स्व सहायता के सुपुर्द करने की बात कही गई थी।

लिहाजा बजट सत्र में मुख्यमंत्री ने पहले चरण में 6 जिलों में रेडी टू ईट फ़ूड का दायित्व स्थानीय पंजीकृत सक्षम महिला स्व सहायता समूहों के हवाले करने का ऐलान किया था।

मुख्यमंत्री की घोषणानुरूप आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले 20 जनवरी 2025 को सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग छत्तीसगढ़ शासन शम्मी आबिदी ने पूरक पोषण आहार योजनांतर्गत रेडी टू ईट निर्माण व वितरण का कार्य छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रायपुर की स्थापित यूनिट की जगह 6 जिलों कोरबा, रायगढ़, सूरजपुर, बलौदाबाजार, दंतेवाड़ा एवं बस्तर में रेडी टू ईट के निर्माण हेतु फर्म एंड सोसायटी के तहत पंजीकृत सक्षम महिला स्व सहायता समूहों को सौंपने आदेश जारी किया था।

वित्तीय वर्ष के समाप्ति के अंतिम सप्ताह में 24 मार्च को मंत्रालय महिला एवं बाल विकास विभाग महानदी भवन रायपुर द्वारा सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत पूरक पोषण आहार व्यवस्था अंतर्गत रेडी टू ईट एवं फोर्टिफाइड आटा का परियोजना स्तर पर स्थापित यूनिट के माध्यम से निर्माण एवं आपूर्ति हेतु महिला स्व सहायता समूहों के चयन एवं कार्य से पृथक करने की प्रक्रिया का निर्धारण करने सर्कुलर जारी किया था।

इस आदेश के प्रभावशील होने से रेडी टू ईट एवं फोर्टिफाइड आटा व निर्माण एवं आपूर्ति संबंधी पूर्व में जारी समस्त निर्देश /आदेश अपास्त हो जाएंगे। राज्य से जारी सर्कुलर संलग्न कर महिला स्व सहायता समूहों के चयन एवं कार्य से पृथक करने की प्रक्रिया का निर्धारण करने सभी जिलों से आवेदन मंगाकर चयन की प्रक्रिया ,प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

स्वचलित मशीन स्थापित होने एवं रेडी टू ईट के नमूनों (सैंपल) की रिपोर्ट खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला से प्राप्त होने के उपरांत प्रदेश के लगभग सभी जिलों में उत्पादन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

आकांक्षी जिला कोरबा में भी कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन,डीपीओ बसंत मिंज के नेतृत्व में फरवरी माह से कोरबा ग्रामीण परियोजना में चयनित महिला स्व सहायता समूह सफुरा माता स्व सहायता समूह सलिहाभांठा द्वारा वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

स्व सहायता समूह ने स्वचलित मशीन से निर्धारित नाम्स अनुरूप रेडी टू ईट का उत्पादन कर लिया है।

मानव स्पर्श रहित स्वचलित मशीन से तैयार हो रहे रेडी टू ईट एवं स्पर्श रहित पैकेजिंग का कार्य स्व सहायता समूहों के लिए एक नया अनुभव है ,जो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का शत प्रतिशत पालन भी सुनिश्चित कराता है।

12 सेक्टर अंतर्गत 348 केंद्रों के 18000 हितग्राही होंगे लाभान्वित

फरवरी माह से कोरबा ग्रामीण परियोजना के अंतर्गत 12 सेक्टर के 348 आँगनबाड़ी केंद्रों के तकरीबन 18 हजार हितग्राही (नौनिहाल, गर्भवती शिशुवती, किशोरी बालिका ) सफुरा माता स्व सहायता समूह सलिहाभांठा द्वारा उत्पादित, प्रदाय किए गए रेडी टू ईट से लाभान्वित होंगी ।

जिले में 2602 केंद्र, करीब सवा लाख हितग्राही

रेडी टू ईट (पूरक पोषण आहार ) योजना से जिले के दस परियोजनाओं के अधीन संचालित 2602 आंगनबाड़ी केंद्रों से करीब सवा लाख (1 लाख 25 हजार ) हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभार्थी बच्चों से लेकर गर्भवती शिशुवती माताएं, शिशुवती बालिकाएं शामिल हैं।

मार्च से इन परियोजनाओं में भी शुरू होने लगेगा वितरण

डीपीओ बसंत मिंज ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्ति से पूर्व मार्च माह से कोरबा शहरी, करतला, पाली एवं पोंडी उपरोड़ा में चयनित समूहों द्वारा रेडी टू ईट वितरण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। शेष परियोजनाओं के यूनिट से उत्पादन में कुछ वक्त लग सकता है।

इनमें से 2 परियोजना चोटिया व कटघोरा में अयोग्यता, अनियमितताओं की पुष्टि पर चयनित समूह ही बदल दिए गए हैं।

लिहाजा यहाँ अभी वक्त लगना लाजिमी है।

कड़ी निगरानी की दरकार, विभाग को रहना होगा चौकन्ना

जिस तरह बायोमेट्रिक पद्धति लागू होने के बाद भी राशनकार्ड धारी हितग्राहियों को बायोमेट्रिक लेकर राशन नहीं दिए जाने की शिकायतें समय समय पर आती रहती हैं ,यहाँ भी महिला एवं बाल विकास विभाग को पोषण ट्रैकर एप से आधार बेस्ड एफआरएस पद्धति से रेडी टू ईट वितरण किए जाने के कार्य की भी सतत निगरानी करनी होगी।

ताकि फर्जी एफआरएस की शिकायतें सामने न आए ।

परियोजनावार चयनित समूह एक नजर में

परियोजना – चयनित समूह

कोरबा शहरी -मां तुलसी स्व सहायता समूह ढोढ़ीपारा

कोरबा ग्रामीण -सफुरा माता स्व सहायता समूह सलिहाभांठा

बरपाली – जय मां दुर्गा स्व सहायता समूह नोनबिर्रा

करतला -जय माँ दुर्गा स्व सहायता समूह नोनबिर्रा

कटघोरा – संतोषी स्व सहायता समूह मलगांव

हरदीबाजार – जय माँ दुर्गा महिला स्व सहायता समूह बोईदा

पाली -प्रगति स्व सहायता समूह रजकम्मा

पोंडी उपरोड़ा – पार्वती स्व सहायता समूह सिंधिया

चोटिया -स्मृति स्व सहायता समूह बूढ़ीपीपर टिहरीसरई

पसान -मां लक्ष्मी स्व सहायता समूह बैरा

मार्च तक पांच आधी परियोजना आ जाएंगी उत्पादन में, पूर्णतः पारदर्शी है वितरण

फरवरी माह से कोरबा ग्रामीण परियोजना से चयनित महिला स्व सहायता समूह द्वारा रेडी टू ईट वितरण कार्य की शुरुआत की जाएगी।

रेडी टू ईट मानव स्पर्श रहित स्वचलित मशीन से तैयार की जा चुकी है।

मार्च माह से करतला, कोरबा शहरी,पाली,पोंडी उपरोड़ा भी उत्पादन में आ जाएंगी।

वितरण व्यवस्था पूर्णतः पारदर्शी है।

बसंत मिंज, डीपीओ महिला बाल विकास अधिकारी कोरबा (छ.ग.)।

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