Tuesday 21st of April 2026

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राजौरी : राजौरी दिवस पर शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि। - मेले में सेना व बीएसएफ जवानों ने दिखाए कर्तव्य

राजौरी दिवस पर शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि।

- मेले में सेना व बीएसएफ जवानों ने दिखाए कर्तव्य

- आजादी दिवस का क्या फायदा जहां पहुंच न सकें गरीब आवाम, बंदिशें

जम्मू/राजौरी/ न्यूज उड़ान

राजौरी दिवस के उपलक्ष्य पर 25 इन्फेंट्री डिविजन मुख्यालय के तत्वाधान एस आफ स्पेड्स डिविजन द्वारा जम्मू संभाग के राजौरी जिले के एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) राजौरी में मेले का आयोजन कर शहीदों को याद किया गया।

मेले का शुभारंभ मुख्यातिथि मेजर जनरल कौशिक मुखर्जी जनरल आफिसर कमांडिग 25 इन्फेंट्री डिविजन , सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी सीएमएस रावत, जम्मू कश्मीर पुलिस के डीआईजी राजौरी - पुंछ रेंज संदीप वजीर, डीसी

अभिषेक शर्मा व अन्य अधिकारियों ने किया।

इससे पहले माल मंडी चौराहे राजौरी में निर्मित शहीदी स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही राजौरी दिवस समारोह का आगाज किया गया ।

इस अवसर पर विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ-साथ सेना के जवानों ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

राजौरी दिवस में काफी उत्साह देखने को मिला। सेना द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करवाए।

वीर नारियों व स्कूली बच्चों के साथ कार्यक्रमों में भाग लेने बाले अन्य लोगों को भी पुरस्कृत किया।

आपरेशन सन्दूर में पाक गोलाबारी में शहीद हुए एडीडीसी राजकुमार थापा जी को भी याद कर श्रंद्धाजलि दी गई।

बलिदान की कहानी, राजौरी की जुबानी

राजौरी दिवस पर सेना व बीएसएफ जवानों द्वारा कर्तव्य दिखाए गए।

आप को बतादें कि वैसे तो भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था , लेकिन भारत का एक ऐसा क्षेत्र जो 13 अप्रैल 1948 पाकिस्तानी कबायलियों के चुंगल से आजाद हुआ था जिसकी याद में हर साल राजौरी विजय दिवस के रूप में उत्साह के साथ मनाया जाता है।

सोमवार को विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि

मेजर जनरल कौशिक मुखर्जी जीओसी, सेना स्टेशन कमांडर राजौरी, सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी सीएमएस रावत, जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीआईजी राजौरी - पुंछ रेंज संदीप वजीर, डीसी अभिषेक शर्मा साथ-साथ अन्य नागरिक और सैन्य अधिकारियों ने भी शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

मुख्य अतिथि के तौर पर जीओसी मेजर जनरल कौशिक मुखर्जी सुबह दस बजे के करीब राणे हवाई पट्टी पर पहुंचे और उसके बाद वह सीधे ही शहीदी स्मारक पर पहुंचे जहां पर शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित करने के बाद मुखर्जी व अन्य अधिकारियों ने आवाम को राजौरी दिवस की बधाई दी और कार्यक्रम को संबोधित किया।

जीओसी कौशिक मुखर्जी ने कहा कि प्राणों की आहुति देने वाले सैन्य और राजौरी के बहादुर नागरिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल राजौरी दिवस मनाया जाता है।

बतन पर मर मिटने बाले सदा अमर रहते हैं। हमें फक्र है उन शहीदों पर जिन्होंने राजौरी को पाकिस्तानी कबायलियों के चुंगल से आजाद करवाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान गोलाबारी में शहीद हुए एडीडीसी राजकुमार थापा जी को भी याद किया।

उन्होंने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और आवाम को हर संभव सहयोग देने का पूरा आश्वासन दिया। साथ ही भाईचारा व देश प्रेम का संदेश दिया।

सेना द्वारा आयोजित प्रदर्शन देख दर्शकों ने दांत तले उंगली चभाई , दर्शकों द्वारा जोरदार तालियों और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहना गई।

राजौरी दिवस कार्यक्रम में मार्शल आर्ट, डॉग शो , संस्कृति कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में भाग लेने बालों को पुरस्कृत किया गया।

......

आजादी दिवस का क्या फायदा जहां पहुंच न सकें गरीब आवाम, बंदिशें

जम्मू/राजौरी/ न्यूज उड़ान

आजादी दिवस पर प्रशासन, सेना द्वारा लाखों रु. खर्च कर हर साल मेले का आयोजन किया जाता है, पर उस मेले का क्या फायदा जो आम लोगों को देखना नसीब न हो और पाबंदियां लगा दी जाएं।

आम लोगों के लिए पाबंदियां क्यों न हों, ऑफिसरों ने जो मेले में आना था।

प्रशासन को आवाम से क्या लेना देना पाबंदियां से यही दर्शाता ।

केंद्र सरकार लाख दावे करे, लेकिन सच्चाई तो यह है कि जम्मू कश्मीर में आज भी अशांति है।

जहां तक जवान भी कंट्रोली तारों के अंदर हैं।

लोगों को लगा था कि धारा तीन सात जीरो हटने के बाद परेशानियों में सुधार होगा , लेकिन नहीं आज भी केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की आवाम आज भी सुरक्षा के चलते रोक टोक व कंट्रीली तारों के झाल में फंसी देखी जा सकती है, चाहे नियंत्रण सीमा-रेखा के पास बसने वाले किसान लोग हों या जिला हैडक्वाटर की सीटी के शहरी लोग, यूटी प्रशासन के बड़े अधिकारियों के आने पर सिटी के रास्ते कुछ कि.मी सड़क मार्ग को सीज कर दिया जाता है।

यही हाल राजौरी स्वतंत्रता दिवस (राजौरी-डे) पर सोमवार राजौरी सिटी में भी देखा गया। लोगों के रोजमर्रा रास्ते , सड़कें सुरक्षाबलों को तैनात कर बंद कर दिए।

जिसके चलते जीएमसी अस्पताल इलाज को आने -जाने वाले मरीज, बुजुर्ग, बच्चे, बीमार महिलाओं , अन्य राहगीर लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। राजौरी के आजादी दिवस पर केंद्र सरकार के सुरक्षा संबंधित सभी दावे खोखले हैं । राहगीर लोगों का कहना था कि जम्मू कश्मीर में शांति होती तो आज सड़कें बंद न होती, हम अपनी मर्जी से स्वतंत्रता के साथ चल-फिर रहे होते, हमें नहीं पता आज राजौरी में क्या हो रहा है।

जम्मू-कश्मीर में नेता व बड़े अवसरों को छोड़ सभी असुरक्षित हैं।

आजादी दिवस के रोज क्षेत्र वासियों को स्वतंत्रता से चलने-फिरने , सेहती दायरा यानी अस्पताल के लिए इलाज को जाने वाले रास्ते, सड़क मार्ग अगर पाबंदी लगा दी जाए तो राजौरी दिवस का क्या फायदा।

रिपोर्ट.....अनिल भारद्वाज

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