Saturday 28th of February 2026

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जिला दण्डाधिकारी श्री कुणाल दुदावत ने दो आदतन अपराधियों को एक वर्ष के लिए जिला बदर किया।

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कोरबा : जिला दण्डाधिकारी श्री कुणाल दुदावत ने दो आदतन अपराधियों को एक वर्ष के लिए जिला बदर किया।

जिला दण्डाधिकारी श्री कुणाल दुदावत ने दो आदतन अपराधियों को एक वर्ष के लिए जिला बदर किया।

आदतन अपराधी अंचल अग्रवाल तथा संजय पावले को किया गया जिला बदर।

कोरबा )न्यूज उड़ान )

जिले में शांति एवं कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा असामाजिक और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने आज दो महत्वपूर्ण और कठोर दण्डात्मक कार्रवाइयाँ की हैं।

जिला दण्डाधिकारी एवं कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 3 एवं 5 के अंतर्गत आदेश जारी करते हुए आदतन अपराधी अंचल अग्रवाल तथा संजय पावले को एक वर्ष की अवधि के लिए कोरबा तथा नौ सीमावर्ती जिलों की राजस्व सीमाओं से जिला बदर कर दिया है।

अंचल अग्रवालः गंभीर आपराधिक प्रकरण, क्षेत्र में दहशत का वातावरण।

पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन अनुसार अनावेदक अंचल अग्रवाल उर्फ जिनी, उम्र-30 वर्ष, पिता श्री अनिल अग्रवाल, साकिन-आर.एस.एस. नगर, एम.आई.जी.-1/55 पुलिस सहायता केन्द्र मानिकपुर, थाना कोतवाली, जिला-कोरबा (छ0ग0) का निवासी है, जो ट्रांसपोर्टिंग का काम करता है। अनावेदक ट्रांसपोर्टिंग के साथ-साथ मारपीट, लूट, भयादोहन, अवैध शराब तस्करी, बलवा जैसे मामला में संलिप्त रहा है।

अनावेदक के द्वारा आम जनता से मारपीट कर उन्हें डराने धमकाने के काम करता रहा है, जो अनावेदक के कृत्यों से आम लोगों के मन में भय व दहशत पैदा कर अपना वर्चस्व स्थापित करता है।

जिनके कृत्यों पर रोक लगाने हेतु समय-समय पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही भी किया गया था, उसके बाद भी अनावेदक के कृत्यों में किसी प्रकार का सुधार नहीं हुआ है।

कई लोग इनके डर से इनके कृत्यो का पुलिस के पास सूचना भी नहीं देते है।

अनावेदक आम लोगों के लिए आंतक का पर्याय बना हुआ है। अनावेदक के विरूद्ध पुलिस सहायता केन्द्र मानिकपुर में मारपीट, थाना, सिविल लाईन रामपुर में लूठ व भयादोहन जैसे गंभीर अपराध पंजीबद्ध है।

अनावेदक अंचल अग्रवाल उर्फ जिनी आंतक का पर्याय बन चुका है।

इसके अपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए यह भविष्य में गंभीर घटना को संगठित गिरोह के साथ घटित कर तनाव फैलाने की योजना बनाना इसके खतरनाक इरादों से दिखता है।

अनावेदक वर्तमान में असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त होने की सूचना प्राप्त हुई है।

अनावेदक के आचरण में सुधार लाने के लिए अनावेदक के विरूद्ध सामान्य विधियों के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक कार्यवाही किया गया, परन्तु कोई असर नहीं हुआ है और न ही सुधार आ रहा है।

जिससे लोक शांति व्यवस्था पर भी प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है। इसके असमाजिक कृत्यों में विधिक तरीके से कार्यवाही किये जाने के बावजूद भी सुधार की कोई अन्य विकल्प नहीं होने से आरोपी को नियंत्रित एवं प्रतिबंधित करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य व्यवस्था एवं लोक सुरक्षा अधिनियम-1990 की धारा-03, 05 के प्रावधानों के अन्तर्गत कार्यवाही किया जाना अत्यंत आवश्यक होने का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

जिले के विभिन्न थाना अन्तर्गत अनावेदक के विरूद्ध कुल 07 अपराधिक एवं 03 प्रतिबंधक प्रकरण पंजीबद्ध है।

न्यायालयीन परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी पर समय-समय पर की गई प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियों और चेतावनियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

उसके असामाजिक आचरण में सुधार न आने तथा निरंतर अशांति फैलाने वाली गतिविधियों के चलते जिला प्रशासन ने उसे जिला बदर किए जाने को जनहित और सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक पाया।

संजय पावलेः शराब माफिया गतिविधियों से लेकर हथियारबंद आतंक तक-10 अपराध और 5 प्रतिबंधात्मक कार्यवाही दर्ज।

पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन अनुसार अनावेदक श्री संजय पावले पिता संपत पावले उम्र-43 वर्ष, साकिन-शंकर नगर खरमोरा, थाना सिविल लाईन रामपुर, जिला-कोरबा (छ0ग0) का निवासी है।

अनावेदक अपराधिक प्रवृत्ति से प्रभाव में आकर लोगों से मारपीट, डराना धमकाना, शस्त्र लहराकर भय पैदाकर करना तथा अवैध मादक पदार्थ शराब बेचने जैसे-मामलों में संलिप्त रहा है।

अनावेदक के द्वारा आम जनता से झगड़ा विवाद करने एवं लगातार शराब बनाने व बिक्री करने का काम करता आ रहा है, अनावेदक के कृत्यों से आम लोगों के मन में भय दहशत पैदा कर अपना वर्चस्व स्थापित करता है।

जिसके कृत्यों पर रोक लगाने हेतु समय-समय में भादवि के तहत् अपराध दर्ज कर एवं प्रतिबंधक धाराओं के अन्तर्गत कार्यवाही किया गया है।

उसके बाद भी अनावेदक के कृत्यों में किसी प्रकार का कोई सुधार नहीं हुआ है।

थाना सिविल लाइन रामपुर और थाना बालको नगर में उसके विरुद्ध कुल 10 आपराधिक प्रकरण और 5 प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियाँ दर्ज हैं। पुलिस रिपोर्ट में यह उल्लेखित है कि आरोपी के भय के कारण स्थानीय नागरिक न तो उसके विरुद्ध शिकायत करते थे और न ही गवाही देने का साहस कर पाते थे।

न्यायालय ने सभी अभिलेखों, केस डायरी, गवाह बयानों और आरोपी के प्रतिरक्षा पक्ष का परीक्षण करने के पश्चात यह कहा कि संजय पावले की समाज में उपस्थिति भय और असुरक्षा को जन्म देती है और वह जनहित एवं कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

दोनों अपराधियों पर समान कठोर प्रतिबंध लागू।

छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के अंतर्गत जारी आदेशों के अनुसार दोनों अपराधियों अंचल अग्रवाल तथा संजय पावले को कोरबा के साथ-साथ बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, तथा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिलों की सीमाओं से 24 घंटे के भीतर बाहर जाना अनिवार्य है।

आदेश प्रभावी रहने की पूरी अवधि अर्थात आगामी एक वर्ष में दोनों अपराधियों को न्यायालय की पूर्व लिखित अनुमति के बिना इन जिलों की राजस्व सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

आदेश का उल्लंघन किए जाने पर उन्हें बलपूर्वक सीमाओं से बाहर किया जाएगा तथा अधिनियम के तहत कठोर दण्डात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अपराध और भय का कोई स्थान नहीं।

दोनों मामलों में जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिले में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है। प्रशासन ने कहा है कि समाज में भय फैलाने, असुरक्षा पैदा करने, नशाखोरी को बढ़ावा देने या कानून-व्यवस्था में विघ्न उत्पन्न करने वाले किसी भी असामाजिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।

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