: गजब चिंहारी छत्तीसगढ़ के
Vivek Sahu
Mon, Nov 4, 2024
गजब चिंहारी छत्तीसगढ़ के, सब के मन ल भाये हे।
छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया, सब के मन हरियाये हे।।
ये भुईयां हे सोन चिरईयां, इहां बड़े कमोइया हें।
जांगर टोरत मेहनत करथें, सबके भूख भगइया हें।।
मेहनत हमर पूजा हावय, खेती हमर भगवान हे।
तरिया डबरी नरवा झोरखी, पानी हमर बरदान हे।।
दुनियां भर हे हमर चिंहारी, अन्नपूर्णा महतारी हे।
सबो तिरथ परसाद बनाथें, हमरो अन्न कुवांरी हे।।
छत्तीसगढ़ मं गंगा बरोबर, महानदी के पानी हे।
अरपा पैंरी मनियारी अऊ, हसदो हमर जिंगानी हे।।
श्रृंगी ऋषि सिहावा आसन, जग जाहिर जे नांव हे।
गंगरेल बांध जिहां बंधाये, जिहां फरसिया गांव हे।।
शबरी दई के पइयां लागौं, राम ल जे ह रिझाये हे।
शिवरीनारायण के महिमा ह, दुनियां भर मं छाय हे।।
रतनपुर के महमाया दई, जेकर महिमा भारी हे।
शक्ति भक्ति सबे ल देथे, जेकर बड़े चिन्हारी हे।।
गजब चिंहारी छत्तीसगढ़ के, सब के मन ल भाये हे।
छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया, सब के मन हरियाये हे।।
रचनाकार -
*श्री प्रहलाद चन्द्र "लखलिया"*
*जैजैपुर (छत्तीसगढ़)*Tags :
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