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अलौकिक और नयनाभिराम भगवान राम के साथ मैय्या सीता और लक्ष्मण भी विराजे श्रीराम दरबार के गर्भगृह में।


कोरबा। सबसे पहले विघ्नहर्ता की प्राण प्रतिष्ठा, फिर सियाराम, लक्ष्मण के साथ राम भक्त हनुमान सहित नौ देवताओं की अनुपम मूर्तियां स्थापित।

जगद्गुरू शंकराचार्य के साथ विद्वान आचार्यो के वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजता रहा राम दरबार।

कल सुबह से राम दरबार परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार से कोरबा की पुण्य धरा धन्य हो गई, ऐसा लग रहा था कि सीता मैय्या और भगवान राम के स्वागत के लिए धरती और आसमान में रहने वाले अपने नयनो को विराम नही देना चाहते और टकटकी लगा कर उस समय का इंतजार कर रहे थे कि कब भगवान राम और सीता मैय्या की अलौकिक और नयनाभिराम मूर्तियों का दर्शन होगा और सियाराम गर्भगृह में पधारेंगे। दोपहर सवा बारह बजते ही विद्वान आचार्यो के श्रीमुख से वैदिक मंत्र बोल रहे थे।

वैदिक मंत्रो से सियाराम सहित अन्य देवी देवताओं आह्वान किया जा रहा था और करीब 01.30 बजे भगवान राम की अलौलिक मूर्ति दिखी और गर्भगृह में सदा के लिये विराजमान हो गये।

इस अवसर पर जगद्गुरू ने कहा कि भारत देवी देवताओं की पुण्य भूमि है और यहां धार्मिक कर्म काण्ड का विशेष महत्व होता है। जिनके घरों में पूजा पाठ के लिये उपयुक्त स्थल नहीं होता वे मंदिरो में जाकर अपनी मनोकामना पूर्ण करते है। घर या मंदिरो में सुबह शाम शंख नांद एवं आरती तथा घंटी बजाने से सकारात्मक उर्जा का संचार होता है और जीवन में सभी दोष दूर होते है। मंदिर या देव स्थल से समाज में नैतिकता, सदाचार और श्रद्धा का भाव निर्मित होता है और जीवन में संस्कार फलीभूत होते है और आदर्श समाज का निर्माण होता है। सुबह शाम शंख नांद हमें उपासना के समय का ज्ञात कराता है।

जगद्गुरू आदि शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने सबसे पहले भगवान राम, सीता मैय्या और लक्ष्मण जी के साथ नीचे में बैठे रामभक्त हनुमान के दैदिव्यमान ललाटो पर तिलक लगा कर आरती उतारी और साथ में खड़े कोरबा विधायक एवं राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल सपत्नीक एवं परिवार सहित दैदिव्यमान मूर्तियों की आरती उतारी और आशीर्वाद मांगा कि हे प्रभु! इस धरा पर पधार कर कोरबा सहित प्रदेश को स्वस्थ, सुरक्षित और वैभवशाली बनाना और रामराज की परिकल्पना को साकार करने हमें संकल्प शक्ति से आबाद करना और ऐसी शक्ति देना कि मैं जनसेवक बन कर क्षेत्र की सेवा कर सकू।

सबसे पहले विध्नहर्ता भगवान श्री गणेश की मूर्ति को प्रतिष्ठित किया गया और आह्वान किया गया कि हमारा काम काज सफल हो। फिर मंत्रोच्चार के साथ राम, सीता और लक्ष्मण तथा रामभक्त हनुमान की मूर्तियों को प्रतिष्ठित किया गया। गर्भगृह में भगवान राम के विराजमान होने के बाद शिव पार्वती सहित कुल नौ मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गयी।

हजारों लोग बने गवाह- चीरस्थायी हुआ भव्य समारोह

राम दरबार में भगवान राम की मूर्ति की स्थापना का यह भव्य धार्मिक समारोह सदा के लिये चीरस्थायी हो गया और यह भव्य समारोह कोरबा के पटल पर सदा के लिए अंकित हो गया। यह धार्मिक समारोह सदा के लिये लोगों के लिये चीरस्थायी बनने के साथ अनुपम आलेख भी खींच गया। कोरबा के कोने कोने से लोग पधारे और कोरबा सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से आये हजारो श्रद्धालु इस कार्यक्रम के गवाह बने।

ऐतिहासिक कलश यात्रा से राममय हुआ कोरबा

भगवान की प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व निकाली गयी कलश यात्रा भी ऐतिहासिक थी। कोरबा की चारों दिशाओं से पधारी नारी शक्ति हजारो की संख्या में कलश सिर पर रख कर जब राम दरबार पहुंची तो नजारा देखने लायक था। ऐसा लग रहा था कि नारी शक्ति से परिसर में नई उर्जा का संचार हो रहा हैं। ऐसी कलश यात्रा शायद कोरबा मे पहली बार देखने को मिली। राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व ही कोरबा कलश यात्रा से राममय हो गया। कलश यात्रा के सामने कर्मा नृत्यदल ढोल नगाड़ो के साथ आगे आगे चल रहा था और कलश यात्रा के पीछे पीछे जन सैलाब भी था।

भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होते ही दर्पण चटक गया

भगवान राम और अगल बगल सीता तथा लक्ष्मण की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो रही तब विधान के अनुसार जब राम के नयन के सामने दर्पण दिखाया गया तो दर्पण चटक गया। देखने वाले सभी ने इसे सौभाग्य का द्योतक समझा। विधान के अनुसार मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के समय जब मूर्ति का अनावरण किया जाता है तो दर्पण दिखाया जाता है, ताकि मूर्ति की सकारात्मक उर्जा दर्पण के रिफ्लेक्ट होकर चारों दिशाओं में संचार हो और सत्व का प्रकाश चारों तरफ फैले।

एक सप्ताह से चल रहा था अनुष्ठान

जयसिंह अग्रवाल और परिवार के राजपुरोहित गुरूजी वृंदावन से पधारे बांके बिहारी गोस्वामी गुरूजी तथा अन्य पंडितों द्वारा गत आठ जून से रोज सुबह शाम राम दरबार परिसर में अनुष्ठान किया जा रहा था और आज अंतिम दिन प्राण प्रतिष्ठा पूजा के लिये जगद्गुरू आदि शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती पूरी से पधारे और अपने सानिध्य में भगवान राम सहित अन्य मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कर राम दरबार में सदा के लिये प्रतिष्ठित कराया। मूर्तियों की आभा से यहां उपस्थित जन सैलाब अपने आप को धन्य महसूस कर रहे थे। हजारों की उपस्थित में यह विशाल धार्मिक आयोजन सफल हुआ और भगवान राम कोरबा के हुये।


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